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Sushil Bhai

@Sushil mishra

Delhi, Delhi, India

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मैं ताऊ का बहुत सम्मान करता हूँ। उनके विचारों से बहुत कुछ सीखने को मिलता है और मैं उनके विचारों से प्रभावित होता हूँ। मुझे लगता है कि और भी बहुत से लोग प्रभावित होते होंगे। जब लोग आपके बातों से प्रभावित हो रहे हों, तो आपकी जिम्मेदारी बनती है कि आप निष्पक्ष रहें, न कि “तीसरा नज़रिया” के नाम पर लोगों को भ्रमित करें। मैं इकॉनॉमी या राजनीति का कोई विद्वान नहीं हूँ। बस ताऊ जैसे लोगों को सुनता हूँ और थोड़ा-बहुत समझने की कोशिश करता हूँ। मेरा एक सवाल है तीनों तीन तालिये उस्तादों से — क्या किसी भी सरकार के लिए 15 साल या तीन कार्यकाल पर्याप्त नहीं है व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन लाने के लिए? 2014 में मैंने भी मोदी जी का समर्थन किया था, लेकिन मुझे बहुत जल्दी समझ में आ गया कि यह सरकार भी गोल-गोल घुमा  रही है!
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मुझे कई बार ऐसा एहसास हुआ है कि ताऊ बीजेपी सरकार को अच्छे से डिफेंड कर जाते हैं और सरकार को विक्टिम सा बना देते हैं। यह सिर्फ मैं तीन तालों को लगातार सुनने के आधार पर अपना अनुभव बता रहा हूँ।
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भाइयों, मार्केट में अभी-अभी एक नए नशे के बारे में पता चला है। बाबा मंडल के नाम से तीन ताल की तरह यह भी बढ़िया नशा देता है। इसका ज़्यादा से ज़्यादा सेवन करने पर बहुत अच्छा नशा है। 😄
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Mai abhi yaha naya hu Mai abhi yaha sikhne ki kosis kar hu , agar koi post edit ya dele karna ho to  kase kare ? Koi bane ki kripa karenge
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अहाँ तिनु तिन तालियाँ के प्रणाम/गोर लगैत छी। धान रोपनी बहुत कठिन काम अछि—ई हमर अपन अनुभव अछि। घंटों झुकि-झुकि काज करैत-करैत पूरा जाँघ आ कमर लोहथ भऽ जाइत अछि। मुदा मिथिला के माटी आ रोपनी के अपनहि आनंद अछि। मिथिला के सबसे प्रसिद्ध पारंपरिक धान-रोपनी गीत “निहुरि-निहुरि के रोपय बहिना, आ दोसर गीत— “खेलैत रहियै, धूपैत रहियै, रोपैत रहियै धान…”  भूल-चूक माफ करब।🙏
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हम अक्सर उम्मीद करते हैं कि नई पीढ़ी ईमानदार, जिम्मेदार और नैतिक बने। लेकिन यह भी सच है कि बच्चे वही सीखते हैं जो वे अपने परिवार, समाज और सार्वजनिक जीवन में देखते हैं। इसलिए यदि समाज में नैतिक मूल्यों का क्षरण हो रहा है, तो उसकी जिम्मेदारी केवल नई पीढ़ी पर नहीं डाली जा सकती।इसी तरह, किसी  भी अपशब्दों का प्रयोग किसी सभ्य समाज के लिए उचित नहीं है।  आज यदि हम यह देखकर दुखी हैं कि नई पीढ़ी अभद्र भाषा का प्रयोग कर रही है, तो हमें यह भी याद रखना चाहिए कि हमें तब भी उतना ही दुख होना चाहिए था, जब हमारे राष्ट्रपिता का अपमान किया जाता था, उन्हें गालियां दी जाती थीं और कुछ लोग उस व्यवहार को प्रोत्साहित भी करते थे। अपशब्द, चाहे किसी के लिए भी हों, गलत हैं। समाज में हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है। यदि हम सार्वजनिक जीवन में कटुता, अपमान और अनैतिक आचरण को सामान्य बना देंगे, तो आने वाली पीढ़ियां..
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Freindsss lagta hai teental ka bhi akhbar leak hai...
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ना लेफ्ट ना राइट जेन जी के साइड 🙏
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