हम अक्सर उम्मीद करते हैं कि नई पीढ़ी ईमानदार, जिम्मेदार और नैतिक बने। लेकिन यह भी सच है कि बच्चे वही सीखते हैं जो वे अपने परिवार, समाज और सार्वजनिक जीवन में देखते हैं। इसलिए यदि समाज में नैतिक मूल्यों का क्षरण हो रहा है, तो उसकी जिम्मेदारी केवल नई पीढ़ी पर नहीं डाली जा सकती।इसी तरह, किसी भी अपशब्दों का प्रयोग किसी सभ्य समाज के लिए उचित नहीं है।
आज यदि हम यह देखकर दुखी हैं कि नई पीढ़ी अभद्र भाषा का प्रयोग कर रही है, तो हमें यह भी याद रखना चाहिए कि हमें तब भी उतना ही दुख होना चाहिए था, जब हमारे राष्ट्रपिता का अपमान किया जाता था, उन्हें गालियां दी जाती थीं और कुछ लोग उस व्यवहार को प्रोत्साहित भी करते थे। अपशब्द, चाहे किसी के लिए भी हों, गलत हैं।
समाज में हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है। यदि हम सार्वजनिक जीवन में कटुता, अपमान और अनैतिक आचरण को सामान्य बना देंगे, तो आने वाली पीढ़ियां..